Tirthankar Vatika


Tirthankar Vatika – तीर्थंकर और उनके केवली वृक्ष

केवली वृक्ष- तपस्या के क्रम में सभी तीर्थंकरों को विशुद्ध ज्ञान (केवल ज्ञान) की प्राप्ति किसी न किसी वृक्ष की छाया में प्राप्त हुई थी, अत: इन वृक्षों को जिनके नीचे तीर्थंकरों को केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई, जैन धर्म में उन्हें केवली वृक्ष कहा जाता है। वर्तमान चक्र के सभी तीर्थंकरों के केवली वृक्ष निम्र प्रकार हैं-

 

क्र. तीर्थंकर संस्कृत नाम केवली वृक्ष सामान्य नाम केवली वृक्ष वैज्ञानिक नाम केवली वृक्ष
1 ऋषभनाथ न्यग्रोध वट वृक्ष फाइकस बन्गालेन्सिस
2 अजितनाथ सप्तपर्ण चितवन, सप्तवर्णी एलस्टोनिया स्कोलेरिस
3 संभव नाथ शाल साल, साखू शोरिया रोबस्टा
4 अभिनन्दन सरल चीड़ पाइनस राक्सबर्घाइ
5 सुमतिनाथ प्रियंगु पियंगु केलीकार्पा मेक्रोफिला
6 पदमनाथ प्रियंगु पियंगु केलीकार्पा मेक्रोफिला
7 सुपाश्र्वनाथ शिरीष सिरस अलबिजिया लीबेक
8 चन्द्रप्रभनाथ नाग नागकेसर मेसुआ फेरिया
9 पुष्पदन्त बहेड़ा बहेड़ा टरमिनेलिया
10 शीतलनाथ बिल्व बेल ईगल मारमिलोस
11 श्रेयांसनाथ तेंदू तेंदू डायोस्पाइरस मिलानोजाइलान
12 वासुपूज्य कदम्ब कदम्ब एन्थोसिफेलस कदम्बा
12 विमलनाथ जम्बू जामुन साइजीजियम क्यूमिनाई
14 अनन्त नाथ पीपल पीपल फाइकस रैलीजियोसा
15 धर्मनाथ दधिपर्ण कैथा फेरोनिया एलीफैण्टम
16 शान्तिनाथ नन्दी तून सिडै्रला तूना
17 कुंथुनाथ तिलक तिलक वेन्डलेन्डिया एक्सर्टा
18 अरहनाथ आम्र आम मैन्जीफेरा इण्डिका
19 मल्लिनाथ अशोक अशोक सराका इण्डिका
20 मुनिसुव्रत नाथ चम्पक चम्पा माइकेलिया चम्पाका
21 नमीनाथ वकुल मौलश्री मोमोसॉप्स एलेन्जी
22 नेमीनाथ वंश बाँस बैम्बू प्रजाति
23 पाश्र्वनाथ देवदारु देवदार सीडस देवदारा
24 महावीर साल साल शोरिया रोबस्टा

 

 

जैन धर्म के आचार्यों, उपाध्यायों का मानना है कि केवली वृक्षों में तीर्थंकरों के अंश विद्यमान रहते हैं, जिनकी सेवा, दर्शन या अर्चना से सम्बन्धित तीर्थंकरों की कृपा प्राप्त होती है।

इस तरह धर्म स्थलों पर केवली वृक्षों के रोपण से उस स्थल की आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है, अत: हमें जैन धर्म स्थलों पर केवली वृक्षों का रोपण करना चाहिए।

चूँकि सभी 24 तीर्थंकर एक चक्र (विशिष्ट� काल अवधि) में क्रमश: अवतरित होते हैं, अत: केवली वृक्षों को एक चक्र की परिधि पर क्रम से रोपित करना चाहिए, जिसका एक स्वरूप निम्र प्रकार हो सकता है-